हे नारी…. हे नारी, तू शक्ती है, तू भक्ती है
तू ममता की, साक्षात मूर्ती है।
तुझसे निपजता सारा जीवन, तूझमें विहरता सारा यौवन,
तू वृध्दों के लिए सेवा है, तू हर सुखों की कर्ता है।
हे नारी….
तू प्रकृति की परिभाषा, तू निसर्ग की परछाई,
तू भजन का भक्तिभाव है, तू रणभूमी की स्फूर्ति है।
हे नारी….
तू है छाया, तू है धूप, तू चंडी का रौद्ररूप,
थर्राती तुझसे धरती है, दिगदिगांत में तेरी कीर्ती है।
हे नारी….
तू सीता के मन में समाई, तू राधा के तन में समाई,
साधूसंत जिसे स्वर्ग कहतें है, तू धरती पर वही मुक्ति है।
Saturday, March 6, 2010
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